कब शकुन नहीं माना जाता — शास्त्र और परंपरा क्या कहती है
बृहत् संहिता के अनुसार गाँव का जीव जंगल में, दिन का जीव रात में, बीमार, डरा, लड़ता या जोड़े में मस्त जीव का शकुन मान्य नहीं होता।
कुछ ऋतुओं में कुछ जीवों के शकुन निष्फल बताए गए हैं — जैसे वसंत में कौआ-कोयल।
संहिता के अनुसार एक कोस से दूर की आवाज़ का भी कोई फल नहीं।
बृहत् संहिता का सामान्य नियम है कि स्त्रियों के लिए शकुन उलटे पढ़े जाते हैं; इस शकुन का अलग नियम नहीं दिया।
आधार: बृहत् संहिता, अध्याय 86, श्लोक 24–28।
by VedicDost — फल शास्त्र-नियमों से, कोई जानकारी सेव नहीं होती
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पुरुष और स्त्री के लिए यह नियम अलग है क्या?
बृहत् संहिता का सामान्य नियम है कि स्त्रियों के लिए शकुन उलटे पढ़े जाते हैं; इस शकुन का अलग नियम नहीं दिया।
क्या शकुन हमेशा सच होते हैं?
शकुन एक संकेत माना जाता है, गारंटी नहीं। शास्त्र भी कहता है कि मन की प्रसन्नता और अपना कर्म सबसे बड़ा शकुन है।
इसका सबसे आसान उपाय क्या है?
2 मिनट आँखें बंद कर 11 गहरी साँस लें, इष्टदेव का नाम लें और शांत मन से काम शुरू करें।