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गोचर: चलते ग्रह आप पर कैसे असर डालते हैं

गोचर का मतलब है ग्रहों का अभी राशि-चक्र में चलना। आपकी जन्म-कुंडली तय है, पर ग्रह आगे बढ़ते रहते हैं। फलदीपिका (अध्याय 26) के अनुसार गोचर आपकी चंद्र राशि (जन्म राशि) से गिना जाता है: चंद्रमा से गिनकर ग्रह जिस भाव से गुज़र रहा है, वही उस समय उसका असर बताता है।

शुभ गोचर भाव (फलदीपिका)

ग्रहचंद्र राशि से शुभ भावएक राशि में समय
सूर्य3, 6, 10, 11एक महीना
चंद्र1, 3, 6, 7, 10, 11सवा दो दिन
मंगल3, 6, 11लगभग डेढ़ महीना
बुध2, 4, 6, 8, 10, 11लगभग एक महीना
गुरु2, 5, 7, 9, 11लगभग एक साल
शुक्र1, 2, 3, 4, 5, 8, 9, 11, 12लगभग एक महीना
शनि3, 6, 11लगभग ढाई साल
राहु / केतु3, 6, 10, 11लगभग डेढ़ साल

फल बदलने वाले नियम

वेध (रुकावट): अच्छा गोचर तब रुक सकता है जब उसी समय कोई दूसरा ग्रह उसके जोड़ीदार "वेध" भाव से गुज़र रहा हो। बल: अपनी या उच्च राशि में चलता ग्रह कठिन भाव में भी कम कष्ट देता है; नीच या अस्त ग्रह अच्छे भाव में भी कम शुभ देता है। दृष्टि: शुभ ग्रह की दृष्टि कठिन गोचर को नरम करती है।

गोचर दशा के साथ चलता है

सिर्फ़ गोचर से बड़ी घटनाएँ तय नहीं होतीं। शास्त्रीय तरीक़ा है — पहले चल रही महादशा देखें, फिर गोचर; दोनों एक दिशा दिखाएँ तो फल साफ़ दिखता है। चंद्र राशि से 12वें, पहले और दूसरे भाव में शनि के गोचर को ही आम बोलचाल में साढ़ेसाती कहते हैं।

धीमे ग्रह (शनि, गुरु, राहु-केतु) सबसे ज़्यादा मायने रखते हैं। उनकी असली तारीख़ें वार्षिक राशिफल में देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गोचर लग्न से देखें या चंद्र राशि से?

फलदीपिका जैसे शास्त्रीय ग्रंथ गोचर चंद्र राशि से गिनते हैं। कई ज्योतिषी दूसरी नज़र के रूप में लग्न से भी देखते हैं।

सबसे ज़रूरी गोचर कौन-सा है?

धीमे ग्रह — शनि, गुरु और राहु-केतु — क्योंकि ये एक राशि में लंबे समय रहते हैं। चंद्र राशि से 2, 5, 7, 9, 11 में गुरु का गोचर शुभ माना जाता है।

क्या ख़राब गोचर का असर कम हो सकता है?

हाँ। वेध, ग्रह का अपना बल और शुभ दृष्टि उसे कम करते हैं, और अच्छी दशा साथ देती है। लगातार मेहनत, धीरज और सरल मंत्र-जप भी मदद करते हैं।

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