होम › बिना जन्म-तिथि ज्योतिष › शकुन संकेत › पूजा का दीपक अचानक बुझना — शास्त्र और परंपरा क…

पूजा का दीपक अचानक बुझना — शास्त्र और परंपरा क्या कहती है

बृहत् संहिता के अनुसार दीपक बिना कारण बुझे, चिनगारी दे या काँपे तो शुभ नहीं; स्थिर, सुनहरी और दाहिनी ओर घूमती लौ जल्दी लक्ष्मी-कृपा का संकेत है।

मिश्र फल

शकुन संकेत

हवा या कम तेल से बुझा दीपक शकुन नहीं — उसे फिर से जलाएँ।

दीपक को हवा से बचाकर रखें और घी/तेल पूरा भरें।

बृहत् संहिता का सामान्य नियम है कि स्त्रियों के लिए शकुन उलटे पढ़े जाते हैं; इस शकुन का अलग नियम नहीं दिया।

आधार: बृहत् संहिता, अध्याय 84, श्लोक 1–2।

क्यों?आधार: बृहत् संहिता, अध्याय 84, श्लोक 1–2
क्या करें: दीपक फिर से जलाएँ, भगवान से क्षमा-प्रार्थना करें और पूजा पूरी करें।

by VedicDost — फल शास्त्र-नियमों से, कोई जानकारी सेव नहीं होती

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पूजा के दीपक के अचानक बुझने का फल पुरुष और स्त्री के लिए अलग है?

बृहत् संहिता का सामान्य नियम है कि स्त्रियों के लिए शकुन उलटे पढ़े जाते हैं; इस शकुन का अलग नियम नहीं दिया।

क्या पूजा के दीपक के अचानक बुझने का फल हमेशा सच होता है?

शकुन एक संकेत माना जाता है, गारंटी नहीं। शास्त्र भी कहता है कि मन की प्रसन्नता और अपना कर्म सबसे बड़ा शकुन है।

पूजा का दीपक अचानक बुझना हो तो क्या उपाय करें?

दीपक फिर से जलाएँ, भगवान से क्षमा-प्रार्थना करें और पूजा पूरी करें। डरने की ज़रूरत नहीं — शकुन सिर्फ़ संकेत है, फल आपके कर्म से बनता है।

इनसे जुड़े और अर्थ

सभी देखें: शकुन संकेत

बिना जन्म-तिथि के और टूल