पूजा के समय छींक — शास्त्र और परंपरा क्या कहती है
पूजा के समय छींक लोक-परंपरा अनुसार ज़्यादा दोष वाली नहीं मानी जाती — हाथ धोकर, आचमन करके पूजा आगे बढ़ाएँ।
पूजा शुरू करते ही छींक आए तो कुछ क्षण रुककर फिर संकल्प लें।
भगवान भाव देखते हैं, छींक नहीं — मन न घबराएँ।
लोक-परंपरा में इसका फल पुरुष और स्त्री दोनों के लिए एक जैसा माना जाता है।
आधार: लोक-परंपरा अनुसार — इस पर शास्त्र-ग्रंथ का सीधा श्लोक हमारे भंडार में नहीं मिला।
by VedicDost — फल शास्त्र-नियमों से, कोई जानकारी सेव नहीं होती
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पूजा के समय छींक का फल पुरुष और स्त्री के लिए अलग है?
लोक-परंपरा में इसका फल पुरुष और स्त्री दोनों के लिए एक जैसा माना जाता है।
पूजा के समय छींक सुबह हो या रात — क्या फ़र्क़ पड़ता है?
शास्त्र समय से ज़्यादा यह देखता है कि छींक किस मौक़े पर आई — काम की शुरुआत, यात्रा या घर-वापसी। सर्दी-ज़ुकाम की छींक शकुन नहीं गिनी जाती।
पूजा के समय छींक हो तो क्या उपाय करें?
हाथ धोकर तीन बार आचमन करें और शांत मन से पूजा पूरी करें। डरने की ज़रूरत नहीं — शकुन सिर्फ़ संकेत है, फल आपके कर्म से बनता है।