गृह-प्रवेश के समय छींक — शास्त्र और परंपरा क्या कहती है
बृहत् संहिता के अनुसार यात्रा से लौटकर या नए घर में प्रवेश के समय छींक शुभ नहीं मानी गई — रुककर इष्टदेव का नाम लें, फिर प्रवेश करें।
संहिता शकुन देखने के तीन मुख्य मौक़े बताती है: काम की शुरुआत, यात्रा और घर-वापसी।
गृह-प्रवेश का मुहूर्त न बदलें, बस थोड़ा रुककर शांत मन से प्रवेश करें।
बृहत् संहिता में छींक के फल में पुरुष-स्त्री का अलग नियम नहीं दिया; संहिता का सामान्य नियम है कि स्त्रियों के लिए शकुन उलटे पढ़े जाते हैं।
आधार: बृहत् संहिता, अध्याय 95, श्लोक 60।
by VedicDost — फल शास्त्र-नियमों से, कोई जानकारी सेव नहीं होती
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या गृह-प्रवेश के समय छींक का फल पुरुष और स्त्री के लिए अलग है?
बृहत् संहिता में छींक के फल में पुरुष-स्त्री का अलग नियम नहीं दिया; संहिता का सामान्य नियम है कि स्त्रियों के लिए शकुन उलटे पढ़े जाते हैं।
गृह-प्रवेश के समय छींक सुबह हो या रात — क्या फ़र्क़ पड़ता है?
शास्त्र समय से ज़्यादा यह देखता है कि छींक किस मौक़े पर आई — काम की शुरुआत, यात्रा या घर-वापसी। सर्दी-ज़ुकाम की छींक शकुन नहीं गिनी जाती।
गृह-प्रवेश के समय छींक हो तो क्या उपाय करें?
बृहत् संहिता के अनुसार अपशकुन पर 11 बार प्राणायाम (गहरी साँस) करके ही आगे बढ़ें। डरने की ज़रूरत नहीं — शकुन सिर्फ़ संकेत है, फल आपके कर्म से बनता है।