छींक आने पर क्या करें — शास्त्र और परंपरा क्या कहती है
बृहत् संहिता के अनुसार अपशकुन पर 11 बार प्राणायाम करके आगे बढ़ें; दूसरी बार हो तो 16 बार, तीसरी बार हो तो यात्रा टाल दें।
मुहूर्त चिंतामणि में भी 11 और 16 श्वास रुकने का यही नियम मिलता है।
छोटी-सी छींक पर काम छोड़ना ज़रूरी नहीं — शांत होकर दोबारा शुरू करें।
बृहत् संहिता में छींक के फल में पुरुष-स्त्री का अलग नियम नहीं दिया; संहिता का सामान्य नियम है कि स्त्रियों के लिए शकुन उलटे पढ़े जाते हैं।
आधार: बृहत् संहिता, अध्याय 95, श्लोक 62।
by VedicDost — फल शास्त्र-नियमों से, कोई जानकारी सेव नहीं होती
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पुरुष और स्त्री के लिए यह नियम अलग है क्या?
बृहत् संहिता में छींक के फल में पुरुष-स्त्री का अलग नियम नहीं दिया; संहिता का सामान्य नियम है कि स्त्रियों के लिए शकुन उलटे पढ़े जाते हैं।
क्या शकुन हमेशा सच होते हैं?
शकुन एक संकेत माना जाता है, गारंटी नहीं। शास्त्र भी कहता है कि मन की प्रसन्नता और अपना कर्म सबसे बड़ा शकुन है।
इसका सबसे आसान उपाय क्या है?
बृहत् संहिता के अनुसार अपशकुन पर 11 बार प्राणायाम (गहरी साँस) करके ही आगे बढ़ें।