कौओं का झुंड शोर मचाए — शास्त्र और परंपरा क्या कहती है
बृहत् संहिता के अनुसार बिना कारण गाँव-मोहल्ले में कौओं का झुंड शोर मचाए तो सावधानी का संकेत है — झगड़े-विवाद से बचें।
झुंड में घूमते कौए संहिता में कलह के सूचक बताए गए हैं।
अक्सर कौए किसी साथी के घायल होने या शिकारी पक्षी को देखकर शोर करते हैं।
बृहत् संहिता का सामान्य नियम है कि स्त्रियों के लिए शकुन उलटे पढ़े जाते हैं; इस शकुन का अलग नियम नहीं दिया।
आधार: बृहत् संहिता, अध्याय 95, श्लोक 8।
by VedicDost — फल शास्त्र-नियमों से, कोई जानकारी सेव नहीं होती
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कौओं के झुंड के शोर मचाने का फल पुरुष और स्त्री के लिए अलग है?
बृहत् संहिता का सामान्य नियम है कि स्त्रियों के लिए शकुन उलटे पढ़े जाते हैं; इस शकुन का अलग नियम नहीं दिया।
क्या कौओं के झुंड के शोर मचाने का फल हमेशा सच होता है?
शकुन एक संकेत माना जाता है, गारंटी नहीं। शास्त्र भी कहता है कि मन की प्रसन्नता और अपना कर्म सबसे बड़ा शकुन है।
कौओं का झुंड शोर मचाए तो क्या उपाय करें?
2 मिनट आँखें बंद कर 11 गहरी साँस लें, इष्टदेव का नाम लें और शांत मन से काम शुरू करें। डरने की ज़रूरत नहीं — शकुन सिर्फ़ संकेत है, फल आपके कर्म से बनता है।