घर की छत या मुंडेर पर कौआ बोलना — शास्त्र और परंपरा क्या कहती है
बृहत् संहिता के अनुसार शांत दिशा में बैठकर घर पर बोलता कौआ मित्र या अधिकारी से मिलने और धन-अन्न लाभ का संकेत है; लोक-परंपरा इसे मेहमान आने से जोड़ती है।
पूर्व दिशा से बोलता कौआ मित्र-मिलन और सोने-अन्न का लाभ बताता है।
दीप्त दिशा से लगातार कर्कश आवाज़ हो तो संहिता सावधानी कहती है।
बृहत् संहिता का सामान्य नियम है कि स्त्रियों के लिए शकुन उलटे पढ़े जाते हैं; इस शकुन का अलग नियम नहीं दिया।
आधार: बृहत् संहिता, अध्याय 95, श्लोक 19–24।
by VedicDost — फल शास्त्र-नियमों से, कोई जानकारी सेव नहीं होती
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या घर की छत या मुंडेर पर कौए के बोलने का फल पुरुष और स्त्री के लिए अलग है?
बृहत् संहिता का सामान्य नियम है कि स्त्रियों के लिए शकुन उलटे पढ़े जाते हैं; इस शकुन का अलग नियम नहीं दिया।
क्या घर की छत या मुंडेर पर कौए के बोलने का फल हमेशा सच होता है?
शकुन एक संकेत माना जाता है, गारंटी नहीं। शास्त्र भी कहता है कि मन की प्रसन्नता और अपना कर्म सबसे बड़ा शकुन है।
घर की छत या मुंडेर पर कौआ बोलना हो तो क्या उपाय करें?
कौए को रोटी का छोटा टुकड़ा और पानी रखें — यही सबसे आसान शुभ काम है। डरने की ज़रूरत नहीं — शकुन सिर्फ़ संकेत है, फल आपके कर्म से बनता है।