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कौए की काँव-काँव की आवाज़ — शास्त्र और परंपरा क्या कहती है

बृहत् संहिता के अनुसार कौए की आवाज़ का फल उसकी ध्वनि से बदलता है — 'का' पर प्रिय मित्र से मिलना, 'कुरु-कुरु' पर ख़ुशी, कर्कश 'करा' पर कलह।

मिश्र फल

शकुन संकेत

घोंसले से आई सामान्य 'काँव' का कोई फल नहीं बताया गया।

मीठी-धीमी आवाज़ शुभ, डरावनी-कर्कश आवाज़ सावधानी वाली मानी गई।

बृहत् संहिता का सामान्य नियम है कि स्त्रियों के लिए शकुन उलटे पढ़े जाते हैं; इस शकुन का अलग नियम नहीं दिया।

आधार: बृहत् संहिता, अध्याय 95, श्लोक 50–51।

क्यों?आधार: बृहत् संहिता, अध्याय 95, श्लोक 50–51
क्या करें: 2 मिनट आँखें बंद कर 11 गहरी साँस लें, इष्टदेव का नाम लें और शांत मन से काम शुरू करें।

by VedicDost — फल शास्त्र-नियमों से, कोई जानकारी सेव नहीं होती

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या कौए की काँव-काँव की आवाज़ का फल पुरुष और स्त्री के लिए अलग है?

बृहत् संहिता का सामान्य नियम है कि स्त्रियों के लिए शकुन उलटे पढ़े जाते हैं; इस शकुन का अलग नियम नहीं दिया।

क्या कौए की काँव-काँव की आवाज़ का फल हमेशा सच होता है?

शकुन एक संकेत माना जाता है, गारंटी नहीं। शास्त्र भी कहता है कि मन की प्रसन्नता और अपना कर्म सबसे बड़ा शकुन है।

कौए की काँव-काँव की आवाज़ हो तो क्या उपाय करें?

2 मिनट आँखें बंद कर 11 गहरी साँस लें, इष्टदेव का नाम लें और शांत मन से काम शुरू करें। डरने की ज़रूरत नहीं — शकुन सिर्फ़ संकेत है, फल आपके कर्म से बनता है।

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