कबूतर का घर में आना या छिपना — शास्त्र और परंपरा क्या कहती है
बृहत् संहिता के अनुसार कबूतर बिस्तर, आसन या वाहन में छिपे तो शुभ नहीं माना गया; लोक-परंपरा में घर पर कबूतर का आना शांति का संकेत भी माना जाता है।
संहिता के अनुसार सफ़ेद कबूतर के संकेत का फल देर से और रंग-बिरंगे का जल्दी दिखता है।
बालकनी में घोंसला हो तो साफ़-सफ़ाई रखें; बीट से सेहत को नुक़सान हो सकता है।
बृहत् संहिता का सामान्य नियम है कि स्त्रियों के लिए शकुन उलटे पढ़े जाते हैं; इस शकुन का अलग नियम नहीं दिया।
आधार: बृहत् संहिता, अध्याय 88, श्लोक 12।
by VedicDost — फल शास्त्र-नियमों से, कोई जानकारी सेव नहीं होती
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कबूतर के घर में आने या छिपने का फल पुरुष और स्त्री के लिए अलग है?
बृहत् संहिता का सामान्य नियम है कि स्त्रियों के लिए शकुन उलटे पढ़े जाते हैं; इस शकुन का अलग नियम नहीं दिया।
क्या कबूतर के घर में आने या छिपने का फल हमेशा सच होता है?
शकुन एक संकेत माना जाता है, गारंटी नहीं। शास्त्र भी कहता है कि मन की प्रसन्नता और अपना कर्म सबसे बड़ा शकुन है।
कबूतर का घर में आना या छिपना हो तो क्या उपाय करें?
2 मिनट आँखें बंद कर 11 गहरी साँस लें, इष्टदेव का नाम लें और शांत मन से काम शुरू करें। डरने की ज़रूरत नहीं — शकुन सिर्फ़ संकेत है, फल आपके कर्म से बनता है।