राहु ग्रह (Rahu (North Node))
राहु एक छाया ग्रह है — आकाश में इसका कोई पिंड नहीं, यह चंद्रमा के पथ का उत्तरी बिंदु है। यह तीव्र इच्छा, महत्वाकांक्षा, विदेश, तकनीक, नई चीज़ें और भ्रम का कारक है। राहु जिस भाव में बैठता है, वहाँ अधूरी इच्छा और बड़ा आकर्षण पैदा करता है। आधुनिक युग में तकनीक और मीडिया इसी के क्षेत्र हैं।
मज़बूत राहु
अच्छी स्थिति में राहु विदेश में सफलता, तकनीक, राजनीति, मीडिया और असाधारण उपलब्धि देता है। ऐसे लोग लीक से हटकर सोचते हैं और बड़ा नाम करते हैं।
कमज़ोर राहु
परेशान राहु में भ्रम, भटकाव या जल्दी सब कुछ पा लेने की बेचैनी रह सकती है। स्पष्ट लक्ष्य, सच्चाई और धैर्य इसकी ऊर्जा को सही दिशा देते हैं।
राहु की दशा
राहु की महादशा 18 वर्ष की होती है। इस दौरान अचानक अवसर, विदेश, तकनीक, बड़ी इच्छाएँ और जीवन में नए मोड़ आते हैं; इसे बदलाव और विस्तार का समय माना जाता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राहु को छाया ग्रह क्यों कहते हैं?
राहु कोई वास्तविक पिंड नहीं है। यह चंद्रमा और सूर्य के पथ के मिलन का उत्तरी बिंदु है, जहाँ ग्रहण होते हैं। इसलिए इसे छाया ग्रह कहा गया है।
राहु की अपनी राशि कौन-सी है?
शास्त्रीय रूप से राहु की कोई अपनी राशि नहीं है। कुछ विद्वान कुंभ को इसकी राशि और वृषभ या मिथुन को उच्च मानते हैं; इस पर मत अलग-अलग हैं।