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केतु ग्रह (Ketu (South Node))

केतु भी छाया ग्रह है — चंद्रमा के पथ का दक्षिणी बिंदु, राहु के ठीक सामने। यह मोक्ष, वैराग्य, अंतर्ज्ञान, अध्यात्म, गहरी खोज और पिछले जन्म के संस्कारों का कारक है। केतु जिस भाव में हो, वहाँ व्यक्ति को पहले से अनुभव होता है पर लगाव कम रहता है। यह ध्यान, ज्योतिष और चिकित्सा का भी कारक है।

कारकमोक्ष, वैराग्य, अंतर्ज्ञान, पिछले जन्म के संस्कार
स्वराशि— (छाया ग्रह; कुछ मत में वृश्चिक)
उच्च— (कुछ मत में वृश्चिक / धनु)
नीच— (कुछ मत में वृषभ / मिथुन)
मित्रमंगल, गुरु, शुक्र, शनि (मत भिन्न)
शत्रुसूर्य, चंद्र
वारमंगलवार (कुछ मत में)
रंगभूरा / धूसर

मज़बूत केतु

अच्छी स्थिति में केतु गहरी अंतर्दृष्टि, अध्यात्म, ज्योतिष, गणित, चिकित्सा और शोध में असाधारण क्षमता देता है। ऐसे लोग कम में संतुष्ट और आत्मिक रूप से मज़बूत होते हैं।

कमज़ोर केतु

परेशान केतु में दिशाहीनता, अलगाव या चीज़ों में मन न लगना महसूस हो सकता है। ध्यान, सेवा और किसी एक लक्ष्य पर टिकना इसे सहज रूप से संतुलित करते हैं।

केतु की दशा

केतु की महादशा 7 वर्ष की होती है। इस दौरान अध्यात्म, आत्म-खोज, अचानक बदलाव और पुराने लगाव से मुक्ति के विषय सामने आते हैं; भीतर की यात्रा का समय माना जाता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राहु और केतु में क्या अंतर है?

राहु इच्छा और भौतिक आकर्षण का प्रतीक है, जबकि केतु वैराग्य और मोक्ष का। दोनों हमेशा एक-दूसरे के ठीक सामने (180 अंश पर) रहते हैं और कुंडली में हमेशा उल्टी दिशा में चलते हैं।

केतु की दशा कितने साल की होती है?

विंशोत्तरी पद्धति में केतु की महादशा 7 वर्ष की होती है। यह आत्म-खोज, अध्यात्म और पुरानी चीज़ों से मुक्ति का समय माना जाता है।

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