गुरु ग्रह (Jupiter)
गुरु (बृहस्पति) देवताओं के गुरु हैं और इसे सबसे शुभ ग्रह माना जाता है। यह ज्ञान, धर्म, शिक्षा, संतान, धन-समृद्धि, विवाह (स्त्री कुंडली में पति) और सद्बुद्धि का कारक है। कुंडली में गुरु की दृष्टि जहाँ पड़ती है, वहाँ सुरक्षा और विस्तार आता है।
मज़बूत गुरु
मज़बूत गुरु वाले लोग ज्ञानी, उदार, धार्मिक और सम्मानित होते हैं। ये शिक्षा, परामर्श, कानून, वित्त और धर्म से जुड़े क्षेत्रों में सफल होते हैं।
कमज़ोर गुरु
कमज़ोर गुरु में आत्मविश्वास, मार्गदर्शन या सही सलाह की कमी महसूस हो सकती है। गुरुजनों का सम्मान, पढ़ाई और दान की आदत इसे सहज रूप से मज़बूत करते हैं।
गुरु की दशा
गुरु की महादशा 16 वर्ष की होती है। इस दौरान शिक्षा, विवाह, संतान, धन-वृद्धि, धर्म-यात्रा और समाज में मान बढ़ने के अवसर आते हैं; इसे आमतौर पर विस्तार का समय माना जाता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गुरु को सबसे शुभ ग्रह क्यों कहा जाता है?
गुरु ज्ञान, धर्म, संतान और समृद्धि का कारक है और इसकी दृष्टि जिस भाव पर पड़ती है, उसे सुरक्षा और बढ़ोतरी देती है। इसीलिए इसे प्रथम शुभ ग्रह कहा गया है।
गुरु किस राशि में उच्च होता है?
गुरु कर्क राशि में उच्च और मकर राशि में नीच होता है। इसकी अपनी राशियाँ धनु और मीन हैं।