शुक्र पर्वत — हथेली में शुक्र पर्वत का अर्थ
शुक्र पर्वत का गुण: स्नेह, अपनापन और जीवन-ऊर्जा।
शुक्र पर्वत कहाँ होता है?
अँगूठे की जड़।
हथेली को हल्का मोड़कर बगल से देखें — जो हिस्सा गद्दी जैसा उठा दिखे, वह उभरा पर्वत है; जो हिस्सा बाक़ी हथेली जितना ही बराबर हो, वह सपाट है।
उभरा या सपाट शुक्र पर्वत
उभरा हुआशुक्र पर्वत उभरा: स्नेह, अपनापन और जीवन-ऊर्जा।
सपाटशुक्र पर्वत सपाट: भावनाएँ मन में रखने वाले; परिवार-दोस्तों के साथ समय ऊर्जा बढ़ाएगा।
सामान्यन ज़्यादा उभरा, न सपाट — इस पर्वत के गुण संतुलित रहते हैं।
शुक्र पर्वत पर निशान
ताराशुक्र पर्वत पर तारा: प्रेम और अपनों के साथ सुख।
क्रॉसशुक्र पर्वत पर क्रॉस: इस पर्वत के गुण में कुछ रुकावटें — धैर्य रखें। एक चिह्न निर्णायक नहीं।
वर्गशुक्र पर्वत पर वर्ग (चौकोर निशान): कठिन समय में बचाव और सहारे का संकेत।
जालीशुक्र पर्वत पर जाली: इस पर्वत के गुण में कुछ अड़चन — लगातार अभ्यास से सुधरती है।
ध्यान रखें एक अकेला चिह्न निर्णायक नहीं; दोनों हाथ देखें — और अपनी इच्छा-शक्ति से प्रवृत्ति बदली जा सकती है। हाथ पढ़ने वाला सच बोले, पर सहानुभूति के साथ — इसलिए यहाँ उम्र, बीमारी या डराने वाली बात नहीं बताई जाती। आधार: पारंपरिक हस्तरेखा-शास्त्र
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हाथ और उँगलियाँ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शुक्र पर्वत कहाँ होता है?
अँगूठे की जड़।
उभरा हुआ शुक्र पर्वत क्या बताता है?
परंपरा में उभरा शुक्र पर्वत उस पर्वत के गुण ज़्यादा होने का संकेत माना जाता है, और सपाट होना कम। यह सिर्फ़ एक संकेत है; पूरा हाथ मिलाकर देखें।
क्या एक पर्वत से कोई फ़ैसला होता है?
नहीं। हस्तरेखा सोचने का एक तरीक़ा है, गारंटी नहीं। एक निशान या पर्वत से कोई फ़ैसला न लें।