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पीठ पर तिल — सामुद्रिक शास्त्र क्या कहता है

बृहत् संहिता के अनुसार पीठ पर तिल सावधानी का संकेत है — मन की परेशानियों और नुक़सान से बचने के लिए योजना और धैर्य रखें।

सावधानी

तिल का राज़

लोक-परंपरा में पीठ का तिल मेहनती और अपने दम पर आगे बढ़ने वाले स्वभाव से जोड़ा जाता है।

पीठ के तिल ख़ुद नहीं दिखते — साल में एक बार किसी से जाँच करवा लें।

बृहत् संहिता (52.9) के अनुसार पुरुष के दाहिने और स्त्री के बाएँ अंग पर निशान अधिक शुभ माना गया है; उलटी तरफ़ फल कुछ कम।

आधार: बृहत् संहिता, अध्याय 52, श्लोक 5।

क्यों?आधार: बृहत् संहिता, अध्याय 52, श्लोक 5
क्या करें: हर महीने आमदनी का छोटा हिस्सा अलग बचाएँ और ख़र्च लिखकर रखें।

by VedicDost — फल शास्त्र-नियमों से, कोई जानकारी सेव नहीं होती

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पीठ पर तिल का फल पुरुष और स्त्री के लिए अलग है?

बृहत् संहिता (52.9) के अनुसार पुरुष के दाहिने और स्त्री के बाएँ अंग पर निशान अधिक शुभ माना गया है; उलटी तरफ़ फल कुछ कम।

क्या पीठ पर तिल का फल बदल सकता है?

हाँ — सामुद्रिक शास्त्र कहता है कि शील (अच्छा आचरण) हर लक्षण से बड़ा है; अच्छे आचरण वाला व्यक्ति कम शुभ लक्षण होने पर भी श्रेष्ठ माना जाता है।

क्या पीठ पर तिल हटवाना चाहिए?

सिर्फ़ ज्योतिष के कारण तिल हटवाने की ज़रूरत नहीं। तिल का आकार, रंग या किनारा बदले, ख़ून आए या खुजली हो तो त्वचा-डॉक्टर को दिखाएँ।

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