होम › बिना जन्म-तिथि ज्योतिष › तिल का राज़ › कलाई पर तिल — सामुद्रिक शास्त्र क्या कहता है

कलाई पर तिल — सामुद्रिक शास्त्र क्या कहता है

बृहत् संहिता के अनुसार कलाई पर तिल बंधन या रुकावट से सावधानी का संकेत है — ज़िम्मेदारियों में बँधने से पहले सोच-समझकर हाँ कहें।

सावधानी

तिल का राज़

काग़ज़ात, क़र्ज़ और गारंटी जैसे मामलों में सावधानी रखें।

लोक-परंपरा में कलाई का तिल कला और हाथ के हुनर से भी जोड़ा जाता है।

बृहत् संहिता (52.9) के अनुसार पुरुष के दाहिने और स्त्री के बाएँ अंग पर निशान अधिक शुभ माना गया है; उलटी तरफ़ फल कुछ कम।

आधार: बृहत् संहिता, अध्याय 52, श्लोक 5।

क्यों?आधार: बृहत् संहिता, अध्याय 52, श्लोक 5
क्या करें: जल्दबाज़ी के फ़ैसलों से पहले रुककर सोचें और रोज़ 5 मिनट शांत बैठें।

by VedicDost — फल शास्त्र-नियमों से, कोई जानकारी सेव नहीं होती

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या कलाई पर तिल का फल पुरुष और स्त्री के लिए अलग है?

बृहत् संहिता (52.9) के अनुसार पुरुष के दाहिने और स्त्री के बाएँ अंग पर निशान अधिक शुभ माना गया है; उलटी तरफ़ फल कुछ कम।

क्या कलाई पर तिल का फल बदल सकता है?

हाँ — सामुद्रिक शास्त्र कहता है कि शील (अच्छा आचरण) हर लक्षण से बड़ा है; अच्छे आचरण वाला व्यक्ति कम शुभ लक्षण होने पर भी श्रेष्ठ माना जाता है।

क्या कलाई पर तिल हटवाना चाहिए?

सिर्फ़ ज्योतिष के कारण तिल हटवाने की ज़रूरत नहीं। तिल का आकार, रंग या किनारा बदले, ख़ून आए या खुजली हो तो त्वचा-डॉक्टर को दिखाएँ।

इनसे जुड़े और अर्थ

सभी देखें: तिल का राज़

बिना जन्म-तिथि के और टूल