क्या ग्रह शेयर बाज़ार चलाते हैं?
यूट्यूब और व्हाट्सऐप पर रोज़ सुनने को मिलता है कि "गुरु बदलेगा तो बाज़ार चढ़ेगा" या "ग्रहण में बाज़ार गिरेगा"। हमने ये दावे अंदाज़े से नहीं, 36 साल के असली आँकड़ों से जाँचे।
एक ही ग्रह-स्थिति में बाज़ार कभी बहुत चढ़ा, कभी बहुत गिरा। हमने जितने नियम जाँचे, उनमें से एक भी बाज़ार की चाल भरोसे से नहीं बताता।
एक ही गुरु, तीन अलग नतीजे
गुरु लगभग 12 साल में बारहों राशियाँ घूम लेता है। यानी 36 साल में हर राशि में गुरु तीन बार आया। अगर गुरु बाज़ार चलाता, तो एक ही राशि में हर बार बाज़ार एक जैसा चलना चाहिए था। नीचे देखिए गुरु जब धनु राशि में था, तब क्या हुआ।
Nifty 50, 1990–2026 (महीने का आख़िरी भाव)
1995–96 में गुरु धनु में था और बाज़ार लगभग वहीं का वहीं रहा। 2007–08 में भी गुरु धनु में था और बाज़ार आधा हो गया। 2019–20 में फिर धनु, बीच में कोविड की बड़ी गिरावट आई, फिर भी इस दौर का अंत 10% ऊपर हुआ। ग्रह एक, नतीजे तीन।
हर राशि में गुरु: हर बार का हिसाब
हर बिंदु एक दौर है, जब गुरु उस राशि में रहा। नीला मतलब उस दौर में Nifty चढ़ा, लाल मतलब गिरा। अगर गुरु का असर होता, तो एक ही राशि के बिंदु एक ही जगह इकट्ठा होते।
गुरु की हर राशि में Nifty का बदलाव (%)
| गुरु की राशि | पहला दौर | दूसरा दौर | तीसरा दौर | नतीजा |
|---|
दौर = गुरु के उस राशि में आने से निकलने तक; वक्री होकर बीच में आना-जाना इसी दौर में गिना है। सिर्फ़ पूरे दौर गिने हैं। अभी गुरु कर्क में है, उसका दौर चल रहा है इसलिए यहाँ नहीं जोड़ा।
कुछ राशियों में तीनों बार बाज़ार चढ़ा, जैसे मकर और तुला। यह भी ग्रह का कमाल नहीं है। पिछले 36 साल में किसी भी एक साल के दौर में Nifty लगभग 71% बार ऊपर गया है। ऐसे में किसी भी राशि में तीनों बार "ऊपर" आने की संभावना अपने आप करीब 36% है। मकर का अच्छा नतीजा असल में 2008 और 2020 की बड़ी गिरावट के बाद आई वापसी थी, और वे दोनों गिरावट 12 साल के फ़ासले पर संयोग से आईं।
शनि, साढ़ेसाती और राहु: वही कहानी
शनि एक राशि में लगभग ढाई साल रहता है, इसलिए 36 साल में ज़्यादातर राशियों में वह सिर्फ़ एक बार आया। एक बार के नतीजे से कोई नियम नहीं बनता। फिर भी देखिए, जिसे लोग डरावना कहते हैं, वहाँ क्या हुआ।
भारत की साढ़ेसाती
भारत की कुंडली में चंद्र कर्क में है। शनि मिथुन, कर्क और सिंह से गुज़रा, यानी भारत की साढ़ेसाती:
| दौर | Nifty |
|---|
डर के उलट, यही Nifty के इतिहास का सबसे तेज़ बढ़त वाला दौर रहा। यह भी एक बार की बात है, नियम नहीं।
भारत की कुंडली में राहु की अंतर्दशा
| अंतर्दशा | दौर | Nifty |
|---|
दो बार चढ़ा, दो बार गिरा। आख़िरी दौर अभी चल रहा है।
शनि की हर राशि का पूरा हिसाब देखें
| शनि की राशि | दौर | Nifty |
|---|
ग्रहण में बाज़ार गिरता है?
1990 से अब तक 128 ग्रहण पड़े। हर ग्रहण के 7 दिन पहले से 7 दिन बाद तक Nifty को देखा।
दोनों लगभग बराबर हैं। ग्रहण वाले हफ़्ते बाकी हफ़्तों जैसे ही निकले।
तुलना: कैलेंडर के 12 महीने
गुरु की 12 राशियों में बाज़ार अलग-अलग चला, यह सच है। पर क्या यह फ़र्क़ ग्रह की वजह से है? इसे परखने के लिए हमने साल के 12 अंग्रेज़ी महीनों (जनवरी से दिसंबर) पर भी वही हिसाब लगाया। महीनों का बाज़ार से कोई ज्योतिषीय रिश्ता नहीं है, फिर भी देखिए कितना फ़र्क़ दिखता है।
हर महीने में Nifty की औसत सालाना दर (%), 1990–2026
गुरु की राशियों में यही फ़र्क़ 59% था, यानी लगभग उतना ही जितना कैलेंडर के महीनों में अपने आप दिख जाता है। कोई यह नहीं कहता कि अक्टूबर "अशुभ महीना" है इसलिए उसमें निवेश मत करो। बाज़ार के आँकड़ों को किसी भी 12 हिस्सों में बाँटेंगे, तो कुछ हिस्से अच्छे और कुछ बुरे निकलेंगे ही।
हर नियम के पीछे संयोग की संभावना
किसी नियम को भरोसे लायक मानने के लिए जाँचा जाता है कि इतना फ़र्क़ सिर्फ़ संयोग से भी आ सकता है या नहीं। इसके लिए हमने बाज़ार के आँकड़ों को 2,000 बार उलट-पुलट कर देखा। आम तौर पर कोई नियम तभी भरोसे लायक माना जाता है, जब संयोग की संभावना 5% से कम हो।
हर नियम के पीछे संयोग की संभावना (%)
Sensex के 41 साल (1985–2026) पर यही जाँच दोबारा की। वहाँ भी कोई नियम 5% से नीचे नहीं आया, और कैलेंडर के महीनों में वहाँ भी 46% का फ़र्क़ दिखा।
वैदिक दोस्त की सलाह
शेयर बाज़ार में पैसा लगाने के फ़ैसले में किसी ज्योतिषी की सलाह के चक्कर में न पड़ें। हमारी भी नहीं। वैदिक दोस्त शेयर की टिप, बाज़ार की तारीख़ या भाव की भविष्यवाणी नहीं देता।
इन बातों पर सावधान रहें
- "इस तारीख़ को बाज़ार गिरेगा/चढ़ेगा" जैसा पक्का दावा
- ग्रह के नाम पर पक्का मुनाफ़ा या "गारंटी"
- पैसे लेकर टिप देने वाले व्हाट्सऐप या टेलीग्राम ग्रुप
- डर दिखाकर उपाय या रत्न बेचना, ताकि "नुकसान न हो"
इसकी जगह क्या करें
- निवेश की सलाह सिर्फ़ SEBI में पंजीकृत सलाहकार से लें, और उनका पंजीकरण SEBI की वेबसाइट पर खुद जाँचें
- उतना ही लगाएँ जितना नुकसान सह सकें
- किसी एक दावे पर नहीं, अपनी ज़रूरत और समय-सीमा के हिसाब से फ़ैसला करें
ज्योतिष का सही उपयोग अपने स्वभाव, धैर्य और जीवन के फ़ैसलों पर सोचने में है। बाज़ार के उतार-चढ़ाव अर्थव्यवस्था, कंपनियों और दुनिया की घटनाओं से चलते हैं।
हमने कैसे जाँचा
- आँकड़े: Nifty 50 का रोज़ का बंद भाव, NSE की niftyindices वेबसाइट से (5 जुलाई 1990 से 16 अक्टूबर 2026)। Sensex का भाव BSE की वेबसाइट से (1985 से)।
- ग्रह: हर दिन के ग्रह, लाहिड़ी अयनांश से। राहु औसत (mean) राहु।
- भारत की कुंडली: 15 अगस्त 1947, रात 12 बजे, दिल्ली। चंद्र कर्क में, पुष्य नक्षत्र; दशा विंशोत्तरी से।
- नियम: गुरु, शनि, राहु की राशि; भारत के चंद्र से गुरु-शनि का शुभ गोचर; साढ़ेसाती; वक्री; ग्रहण; अमावस्या-पूर्णिमा; भारत की महादशा और अंतर्दशा।
- कमी: शनि का एक चक्कर लगभग 30 साल का है, इसलिए उसकी कई राशियाँ सिर्फ़ एक बार आईं। गुरु और शनि की एक जैसी जोड़ी 36 साल में दोबारा बनी ही नहीं, इसलिए उसकी तुलना संभव नहीं थी।
यह लेख सिर्फ़ जानकारी और जागरूकता के लिए है। यह निवेश की सलाह नहीं है।
स्रोत: NIFTY Indices (NSE) ऐतिहासिक आँकड़े · BSE ऐतिहासिक आँकड़े
18 अक्टूबर 2026 · VedicDost