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चित्रा नक्षत्र

14वाँ नक्षत्र · स्वामी मंगल · राशि कन्या / तुला

स्वामी ग्रहमंगल
राशिकन्या / तुला
देवताविश्वकर्मा (त्वष्टा)
प्रतीकचमकता मोती / रत्न
नाम अक्षरपे, पो, रा, री
गणराक्षस

स्वभाव

चित्रा के जातक आकर्षक, रचनात्मक और सुंदरता की समझ रखने वाले होते हैं। ये कुछ बनाना, सजाना और नया रूप देना पसंद करते हैं। आत्मविश्वास ऊँचा होता है और ये भीड़ में अलग दिखते हैं।

करियर

वास्तुकला, डिज़ाइन, इंजीनियरिंग, फ़ैशन, फ़ोटोग्राफ़ी, आभूषण और निर्माण में ये सफल होते हैं। जहाँ सृजन और तकनीक मिले, वहाँ ये चमकते हैं।

रिश्ते

रिश्तों में ये आकर्षक और जोशीले होते हैं। साथी से सम्मान चाहते हैं; तुलना और अहं से दूर रहें तो प्रेम गहरा होता है।

सुझाव: जो भी बनाएँ, उसे पूरा करके ही दिखाएँ — आधा काम आपकी चमक को कम करता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चित्रा नक्षत्र का स्वामी और देवता कौन हैं?

चित्रा का स्वामी ग्रह मंगल है और देवता विश्वकर्मा (त्वष्टा) हैं, जो देवताओं के शिल्पकार माने जाते हैं।

चित्रा नक्षत्र किन राशियों में आता है?

चित्रा के पहले दो चरण कन्या राशि में और अंतिम दो चरण तुला राशि में आते हैं।

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